छठ पूजा
तारीखें
इसकी कहानी
छठ पूजा सूर्य भगवान और छठी मैया की पूजा का त्योहार है — यह चार दिन तक चलता है और बिना पंडित के, खुद किया जाता है।
कहानी है कि जब पांडवों ने द्रौपदी के साथ सूर्य भगवान की पूजा करके अपना राज्य वापस पाया था, तभी से छठ पूजा की परंपरा शुरू हुई। कुछ लोग इसे छठी मैया से जोड़ते हैं, जो बच्चों की रक्षा करती हैं और संतान-सुख देती हैं।
यह व्रत बहुत कठिन माना जाता है — पहले दिन नहाय-खाय (नदी में नहाकर शुद्ध भोजन), दूसरे दिन खरना (शाम को गुड़ की खीर खाना), तीसरे दिन संध्या अर्घ्य (डूबते सूरज को जल चढ़ाना), और चौथे दिन उषा अर्घ्य (उगते सूरज को जल चढ़ाना) होता है — पूरे दिन निर्जल रहकर।
शाम को पूरे परिवार के साथ नदी या तालाब के किनारे जाकर, बांस की टोकरी में फल-मिठाई सजाकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह त्योहार सूर्य देवता का शुक्रिया अदा करने और पूरे परिवार की खुशहाली मांगने का दिन है।