करवा चौथ
तारीखें
इसकी कहानी
करवा चौथ सुहागन औरतें अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं — यह प्यार और विश्वास का व्रत है।
कहानी है रानी वीरवती की, जिसने अपने पहले करवा चौथ व्रत में भूख-प्यास से बेबस होकर चांद देखने से पहले ही खाना खा लिया था। कहा जाता है कि उसके पति की जान खतरे में आ गई, और उसके भाई-भाभी ने चालाकी से नकली चांद दिखाकर उसे व्रत तोड़ने दिया था। जब वीरवती को सच पता चला और उसने पूरा व्रत विधि से पूरा किया, तब उसके पति की जान बच गई। उसी दिन से माना जाता है कि करवा चौथ का व्रत सही तरीके से पूरा करने पर पति की उम्र लंबी होती है।
इस दिन औरतें सुबह सवेरे सरगी खाती हैं और पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं — बिना पानी के। शाम को हाथ में मेहंदी लगाकर, सोलह-श्रृंगार करके, छलनी से चांद का दीदार करती हैं और उसके बाद अपने पति का चेहरा देखकर व्रत खोलती हैं।
करवा चौथ सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि पति-पत्नी के भरोसे और प्यार का उत्सव है, जो पूरे मोहल्ले में मिलकर मनाया जाता है।